
अभी थोड़ी देर पहले ही दूबे जी से तीसरी गली मे जवाहर भाई के संचार अड्डे पे मुलाक़ात हो गई!कई दिन से मे उनसे कुछ चर्चा करना चाहता था आज उन्हें अकेले देख कर सोचा अपने मन की बात कह ही डालूँ !मैंने दूबे जी से कहा की मैंने पुलिस को बहुत पास से देखा है , पुलिस वैसी कदापि नहीं है जैसा कि हम अक्सर हिन्दी फिल्म मैं हम लोग देखते हैं !
दूबे जी के समक्ष इस बात को साबित करने के लिए मैंने कुछ रोचक तथ्य उनके सामने रखे जो अक्सर हिन्दी फिल्म मे हम देखते रहते है ! यादव,कदम्ब, पवार ,सावंत ,शर्मा इत्यादि वो कालजयी किरदार हैं जो हिन्दी सिनेमा मे अक्सर पुलिस टीम का हिस्सा होते हैं और हमेशा सादी वर्दी मे रहते हैं . यह प्राय सफ़ेद शर्ट जो अक्सर शरीर से ज्यादा बड़ी होती है तथा खाकी पैंट और भूरे जूते पहेनते है ! समय के साथ इनकी पोशाक मे काफी परिवर्तन हुआ है. अब आजकल की फिल्म मे यह अक्सर जींस और टी-शर्ट मे दिखाई पड़ते हैं वो स्पोर्ट्स के जूते के साथ ! अक्सर ही यह ९म्म की पिस्तोल या फिर 38 बोरे की रेवोल्वर को अपनी कमर मे खोसे रहते है. अक्सर हिन्दी फिल्म मे यही किरदार खलनायक से पैसे खा के या तो हीरो की यातना चैम्बर मे बंद करके धुनाई करते है या फिर मुठभेड़ मे उसे अथवा उसके परिवार वालो को मार गिराते है ! यह किरदार अक्सर बिना वारंट के तलाशी भी ले लेते है और ज़रुरत पड़ने पे उठा भी लाते है !यह किरदार अक्सर टाटा सूमो और क्वालिस जैसी गाड़ी से चलते है ! NOKIA COMMUNICATOR इनका प्रिय मोबाइल फ़ोन होता है ! bulletproof jacket कभी भी नहीं पहनते चाहे गोली पैर के पास धुल उड़ाते हुवे चली जाये पर क्या मजाल जो इन्हें छू भी जाये !जब कभी इन वीर पुलिसकर्मियों की यदि आतंकवादी तत्व से मुठभेड़ हो जाती है तब यह ak-47 जैसे स्वचलित असलहे भी इस्तेमाल करते है ! राजू , श्यामू , रंगा इत्यादि अक्सर इनके मुखबिर हुआ करते हैं जो समय - समय पे इन्हें गोपनीय सूचनाएं उपलब्ध कराते है ! इनके यह मुखबिर अक्सर वाहन चोर , मोबाइल चोर ,चरस और गांजा पीने वाले , उचक्के इत्यादि होते है ! इन मुखबिर लोग का पेमेंट इन किरदार को मिलने वाले हफ्ते मे से होता है अक्सर पकडे जाने पे इनका यही बयान होता है की साहब खबरी को पैसा अपने वेतन मे से नहीं दिया जा सकता इसलिए यह बहाना काफी प्रयुक्त होता है ! अक्सर मुठभेड़ करने से पहले यह गीली तौलिया अथवा कम्बल का प्रयोग करते हैं ताकि फोरेंसिक जांच मे न फँस सकें ! शुरुआत मे यह काफी इमानदार होते है लेकिन बाद मे जब आयकर विभाग के छापे मे पकडे जाने के बाद यह अपना असली जलवा दिखाते है !अक्सर ही इनका विवाद किसी बड़े राजनीतिक व्यक्ति अथवा माफिया डान से होता है जिसका दोस्त मुख्यमंत्री और गृहमंत्री दोनों ही होते है !मुख्यमंत्री और गृहमंत्री दोनों ही इनकी फाड़ने मे कोई कसर नहीं छोड़ते है !
यह तो है हमारी फ़िल्मी पुलिस जबकि हमारी असली पुलिस इससे काफी अलग है..वो कर्मठ है और हमेशा हमारी रक्षा को तैयार है..यह छोटा सा लेख उन सभी देशभक्त सिपहियौं को समर्पित है जिनको अक्सर हमारी फिल्मो मे गलत दिखाया जाता है !
!!!जय हिंद !!!